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शर्मनाक- सैंट्रल टाउन में एक महीने में 11 अवैध दुकानों की टूटी सीलें, एक के खिलाफ भी कारवाई नहीं करवा पाया निगम प्रशासन

जालंधर /अनिल वर्मा : शहर में कई अवैध इमारतों को निगम ने लंबी कागजी कारवाई करने के बाद सील किया मगर उनमें से ज्यादातर अवैध इमारतों को प्राप्टी मालिकों द्वारा खुद ही सील तोड़ कर खोल लिया गया मगर निगम प्रशासन के लाचार सिस्टम की वजह से आज तक एक भी ऐसे प्राप्टी मालिक के खिलाफ निगम एफआईआर दर्ज नहीं करवा पा रहा जिस कारण शहर में नाजायज इमारतें बनाने वालों के दिलों में निगम का डर पूरी तरह से खत्म हो चुका है। मंडी फैंटनगंज में जिंदल कारपोरेशन वाली इमारत को निगम ने दो बार सील किया मगर दोनो बार सील तोड़ ली गई इसी रोड पर शिव मंदिर के नजदीक निगम ने चार दुकानों को सील किया था जिसके पीछे चार रिहायशी घरों को गिराकर वहां बड़े बड़े हाल बना कर दो मंजिला लैंटर डाल लिया गया था अब बीते सप्ताह इन दुकानों की भी सील प्राप्टी मालिक ने खुद ही तोड़ ली और दोबारा यहां अवैध निर्माण शुरु करवा लिया।








मंडी चौंक में शनि मंदिर के नजदीक मित्तल हार्डवेयर का रिहायशी नक्शा पास है निगम के एटीपी सुखदेव वशिष्ट ने यहां भी नोटिस जारी किया मगर बाद में फाईल को दबा लिया।

प्रताप बाग के नजदीक तीन दुकानों को निगम ने दो बार सील किया दोनो बार दुकान मालिकों ने सील तोड़ ली इसके बाद निगम कमिशनर ने एक सप्ताह का समय देकर तीनों दुकानदारों को सामान बाहर निकालने का समय दिया मगर एक महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद इन दुकानों को न तो दोबारा सील किया जा रहा है और न ही दुकान मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है।

मंडी फैंटनगंज पुराने डाकखाने के सामने एक होटल को निगम ने नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे थे मगर प्राप्टी मालिक न तो होटल के मंजूरशुदा नक्शा पेश कर पाया और न ही निगम ने इस होटल को सील करने की फाईल आगे बढ़ाई।

इसी सैक्टर में होटल एजीआई इन्न के सामने एक पुराने मड्ड हाउस की छत बदलने के लिए जनवरी 2021 में एक डम्मी लैटर लिया गया और यहां तत्कालीन एटीपी की मिलीभगत से 6 बड़े बड़े शोरूम का अवैध निर्माण शुरु करवा दिया गया जिसका कोई भी नक्शा पास नहीं है। निगम कमिशनर अभिजीत कपिलेश के लिए ऐसे अधिकारी बड़ी चुनौती बने हुए है जो उनको अपने शातिर दिमाग से बड़ी आसानी से मात दे रहे है और निगम के खजाने को जमकर लूट रहे हैं। गौरतलब है कि इस विभाग की कमान दो बड़े अधिकारियों के हाथ में है मगर फिर भी इस विभाग में भ्रष्टाचार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।