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जालंधर में 200 रुपये से लेकर 2000 तक बिकते हैं “लंकेश” हर साल होता है लाखों का कारोबार


 


दशहरा पर्व 5 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसमें लंकानरेश रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले दहन अहम माने जाते हैं। इसलिए पुतले बनाने वालों की भी अहमियत उतनी ही है। जहां शहर के मुख्य दशहरा पर्व में दशानन कुंभकरण और मेघनाद के पुतले बनाने के लिए दूरदराज से ही कारीगरों को बुलाते हैं, वही जालंधर के अशोक नगर में एक ऐसी गली है रावण वाली गली से भी जानी जाती है क्योंकि यहां बच्चों से लेकर बड़े तक दशानन के पुतले बनाते हैं।

यहां दशहरा पर्व से 10 दिन पहले ही जहां रावण ही रावण के पुतले दिखाई देते हैं। यहां 1 फीट से लेकर 20 फीट तक के रावण ही रावण के पुतले बिकते हैं। , जिनका दाम भी महज 200 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक के है। जहां से छोटे बच्चों से लेकर बढ़े तक अपनी गली नुक्कड़ पर दशानन का दहन करने के लिए पुतले खरीद कर लेकर जाते हैं। जैसे-जैसे रावण का कद बढ़ेगा दाम भी वैसे ही बढ़ता जाता है।

वैसे तो यह गली कलाकारों से ही भरी हुई है इनमें कोई हस्तकला का नमूना पेश करते हुए बांस की चटाई या बनाता है  तो कोई टोकरियां, इसके अलावा यहीं पर बैंड बाजा बजाने वालों के परिवार भी हैं। जो श्राद्ध के समय से ही पुतले बनाने में जुट जाते हैं। परिवार का प्रत्येक सदस्य पुतले बनाने में मदद करता है फिर चाहे वह बांस को बांधने पुतलों पर कागज चिपकाना हो । क्योंकि जब विवाह शादियों के आयोजन उनके पास नहीं होते हैं तो उनकी आजीविका का साधन पुतलों की बिक्री ही बनती है।