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जालन्धर-शातिर ठेकेदारों ने हैल्थ विभाग की मिलीभगत से कर दिया लाखों का ट्रांस्पोर्ट घोटाला, दो धर्मकंडों के मालिक तथा ठेकेदार तलब

अनिल वर्मा / जालन्धर नगर निगम के हैल्थ एवं सैनिटरी विभाग की मिलीभगत से कूड़ा लिफ्ट करने वाले ठेकेदार ने लाखों रुपयों का ट्रांस्पोर्ट घोटाला किया है। शातिर ठेकेदार ने शहर के अलग अलग डंप स्थानों से कूड़ा लिफ्ट करने के एवज में निगम को दिए बिल टिप्परों के नहीं बल्कि दोपहिया वाहनों के निकले हैं। ठेकेदार ने इन नंबरों को टिप्पर का बता कर लाखों टन कूड़ा लिफ्ट करने के बदले निगम से लाखों रुपयों की पैमेंट का क्लेम किया था जिस को सैनिटरी इंस्पैक्टर , चीफ सैनिटरी इंस्पैक्टर तथा सहायक हैल्थ आफिसर ने पास कर दिया इसके बाद जब बिल डीसीएफए के पास पहुंचे तो मामले की शिकायत कमिशनर के पास पहुंच गई कि बिल में टिप्परों के फर्जी नंबर बता कर लाखों रुपयों के बिल पास करवाए जा रहे हैं तो कमिशनर ने मामले की फाईल अपने पास मंगवाई शुरुआती जांच में बिल में बताए गए वाहनों के नंबर दोपहिया वाहनों के निकले हैं जिसके बाद ठेकेदार को दोषी मानते हुए उसका ठेका रद्द कर दिया गया अब निगम अपने स्तर पर शहर के डंप स्थानों से कूड़ा लिफ्ट करने का काम शुरु करेगा। इस मामले में गहनता से जांच करने के लिए कमिशनर अभिजीत कपलिश की ओर से सहायक कमिशनर राजेश खोखर तथा सहायक हैल्थ अफिसर डा. कृष्ण को जिम्मेदारी सौंपी है और तीन दिनों में मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। 








बिल जिस पर दोपहिया वाहनों के नंबर अंकित हैं और निगम के अधिकारियों ने सत्यापित किए हैं

निगम की विभिन्न डंपिग साइट्स से कूड़ा उठाने के बाद ठेकेदार को वाहनों का वजन करवाना पड़ता है। वह पर्ची निगम में जाती है और उसी के हिसाब से ठेकेदार को पेमेंट होती है। कूड़ा उठाने वाले ठेकेदार ने सभी गाड़ियों का वजन बस्ती बावा खेल स्थित उषा धर्मकंडा और मठारू धर्मकंडा पर करवाया।

बिल में अंकित वाहनों के नंबर परिवहन की साइट पर चेक करने पर दोपहिया वाहनों के निकले

दोनों धर्म कांटों से जो वजन करवाने के बाद बिल मिले हैं उन पर तीन वाहनों (टिप्परों) के नंबर पीबी 65-4030 , पीबी 08-0657 और पीबी 08-1884 अंकित हैं। यह तीनों नंबर किसी बड़े वाहन के नहीं बल्कि दोपहिया वाहनों के हैं। भारत सरकार की परिवहन साइट पर इन नंबरों को डालने पर साइट स्पष्ट दिखा रही है कि यह दोपहिया वाहनों के नंबर है। यहां पर हैरानी की बात तो यह है कि नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी आंखें मूंद कर या फिर यह कहें कि मिलीभगत करके बिलों पर अपने हस्ताक्षर करके इन्हें सत्यापित कर डाला। बता दें कि ठेकेदार का बिल अकाउंट में जाने से पहले सेनेटरी इंस्पेक्टर , चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर और एएचओ के पास जाता है। इनके हस्ताक्षर होने के बाद ही पेमेंट होती है।