जालन्धर में पेरेंट्स ने एकजुट होकर प्राईवेट स्कूलों के खिलाफ निकाली विशाल रैली..

“कहा : शिक्षा माफिया हमारा खून चूस रहा प्रशासन भी नहीं कर रहा हमारी सुनवाई -पेरेंट्स”

अनिल वर्मा
जालन्धर में प्राईवेट स्कूलों के खिलाफ पेरेंट्स का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है इस मामले में जिला प्रशासन भी प्राईवेट स्कूलों के खिलाफ कोई कारवाई करता नजर नहीं आ रहा जिससे पेरेंंट्स को आए दिन प्राईवेट स्कूलों के प्रबंधकों के खिलाफ धरना प्रर्दशन कर रहे हैं। आज सैंकड़ों की तदाद में पेरेंट्स ने इकट्ठा होकर जालन्धर में रैली निकालते हुए डीसी दफ्तर के बाहर जब्रदस्त प्रदर्शन किया।

पेरेंट्स ने आरोप लगाया कि स्कूल लगातार मनमर्जी से फंड व अन्य खर्चे के नाम पर पैसे वसूल रहे हैं। अगर कोई इन्कार करता है या इनकी मांग पूरी नहीं कर सकता तो उनके बच्चे का रिजल्ट रोककर ब्लैकमेल किया जा रहा है। कभी उनसे एनुअल फीस व बिल्डिंग फंड तो कभी और नाजायज खर्चे के नाम पर पैसे मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान कामकाज ठप हो गया तो घर का गुजारा भी मुश्किल से चलाया गया। इसके बावजूद प्राइवेट स्कूल वाले उनसे जबरन अलग-अलग फंड मांग रहे हैं।

इसी दौरान एक प्रवक्ता ने कहा प्राइवेट स्कूलों की फीस का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। उन्हें अंतरिम आदेश हैं कि केस का आखिरी फैसला होने तक वो सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते हैं। इसके अलावा कोई दूसरा फंड या खर्चा नहीं ले सकते। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने भी राजस्थान के प्राइवेट स्कूलों के मामले में अंतरिम आदेश दिया है, वो भी पंजाब पर लागू होता है। इसमें कहा गया है कि स्कूल 2019-20 की नोटिफाइड फीस के बराबर साल 2020-21 की फीस 6 महीने की किश्तों में ले सकते हैं। उन्हें यह भी कहा गया है कि इसके अलावा किसी भी फीस या अन्य बकाया न देने पर बच्चों की आनलाइन या आफलाइन पढ़ाई नहीं रोक सकते और न ही बच्चों को परीक्षा में बैठने से रोका जा सकता है। उनके रिजल्ट पर भी रोक नहीं लगाई जा सकती।

फिलहाल इस मामले में किसी प्राईवेट स्कूल प्रबंधक का कोई पक्ष सामने नहीं आया। पक्ष मिलने के बाद उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।