कोटला घोटाला: राजनीति के भेंट चढ़ा करोड़ों का घोटाला, अफसरों पर दबाव ठंडे बस्ते में डालो आगे इलैक्शन है बदनामी होगी..!

जालन्धर अनिल वर्मा
कांग्रेसी पार्षद राजविंदर सिंह राजा द्वारा कोटला गांव में स्थित केन्द्र सरकार की जमीन केा घोटाला का पर्दाफाश करने के लिए जितना जोरशोर से यह मुद्दा उठाया गया था अब वही मुद्दा राजनीति की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। राजनीति प्रैशर में राजस्व विभाग के अधिकारी अब मामले को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल चुके हैं। जबकि इस जमीन से संबधित रिकार्ड तथा शिकायतें केन्द्र सरकार के ग्रह मंत्रालय तक भी पहुंच चुकी है।

डिप्टी कमिशनर जालन्धर के पास पहुंची शिकायतों के बाद यहां राजस्व विभाग के नायब तहसीलदार विजय कुमार,कानूननगो गुरदीप लाल एवं पटवारी पूजा पुलिस फोर्स सहित पहुंची थी और यहां कब्जा तथा जमीने बेचने वाले दर्जनभर लोगो का रिकार्ड जुटाया था मगर रिपोर्ट तैयार करने के दौरान राजनीति का प्रैशर इस कदर हावी हुआ कि इस घोटाले के मुख्य सूत्रदारों का नाम रिपोर्ट से गायब कर दिया गया और उन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 447 के तहत मामला दर्ज करवा दिया गया जिनको यहां जमीने बेची गई थी।

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पार्षद राजा का कहना है कि उनके ऊपर कोई दबाव नहीं है मगर अफसर सही दिशा में काम नहीं कर रहे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार की एक खुफिया एजैंसी ने भी इस घोटाले की जांच करनी शुरु कर दी है जिसमें 20 से 25 लोगों का नाम सामने आया है जोकि इस जमीन को बिना मालिकी बेच रहे थे जिनमें कुछ लोग नेता,प्राप्टी डीलर, कालोनाईजर तथा फाईनैंसर हैं।

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वहीं इस मामले में जालन्धर से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने भी केन्द्र सरकार को शिकायतें भेजी हैं जिसमें कुछ अफसरों के नाम भी शामिल किए गए हैं जोकि सरकार को गुमराह कर भूमाफियाओं के हाथों जमीने बिकवा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में जालन्धर राजस्व विभाग से जुड़़े सरकारी अफसरों की मुश्किलें बढऩे के आसार साफ दिखाई दे रहे हैं।