खन्ना पुलिस द्वारा करोड़ो रुपये की “हवाला” राशि जब्त करने का मामला

फादर ऐंथोनी जी, सहोदय जैसी और कितनी कंपनियां चल रही हैं- अमित तनेजा

Rozana Post

हिन्दू सुरक्षा मंच के अध्यक्ष अमित तनेजा ने इसाई मिशनरियों के ठिकाने से पकड़ी गई करोड़ों की हवाला राशि के मामले में कई ऐसे प्रश्न उठाए हैं जिनका जवाब अभी तक अंधेरे में ही है। प्रेस को विज्ञप्ति जारी करते हुए अमित तनेजा ने कहा कि जालंधर में इसाई पादरी से बरामद 9.66 करोड़ की राशि वाली सनसनीखेज घटना पर पर्दा डालने के लिए फादर ऐथोनी ने जो पत्रकार सम्मेलन में जवाब दिया है वो बेहद चौंकाने वाला है।

बिना किसी लालच व धर्म का प्रचार करने का दावा करने वाले फादर ऐंथोनी के इस बयान ने मिशनरियों की गतिविधियों के संदेहास्पद होने पर बड़ी और पक्की मोहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके सिलसिलेवार जवाब जानना जरूरी है।

1. सहोदय नामक पार्टनरशिप फर्म जिसके नाम पर ये कारोबार किया जा रहा था जिसके एक पार्टनर फादर एंथोनी भी हैं। एंथोनी का दावा है कि इस फर्म का सालाना कारोबार 40 करोड़ रुपए है। अब आयकर विभाग खुलासा करे कि ये प्राफिट मेकिंग पार्टनपशिप फर्म हर साल कितना इनकम टैक्स देती रही है?

2. किसी भी फर्म के सालाना कारोबार का अर्थ होता है कि एक वर्ष में कितनी राशी का लेन-देन हुआ। इसका मतलब कारोबारी नजरिये से यह है कि फर्म ने एक साल में पच्चीस करोड़ लिया व पन्द्रह करोड़ दिया। या फिर तीस करोड़ लिया व दस करोड़ दिया। आखिरकार जिन किताबों को बेचा गया उन पर कागज, प्रिंटिग, बाईडिंग, पैकिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, स्टाफ इत्यादि का खर्च तो हुआ ही होगा। यदि एक साल में तीस आने व दस जाने के फार्मूले को भी माना जाए तो एक साल में आने वाले तीस करोड़ का पचपन फीसदी एक ही दिन में कैसे आ गया?

3. खन्ना की पुलिस को भला कैसे इल्म हो सकता है कि जालंधर के कौन से गांव के किस कूचे में कितने नकद रुपए मौजूद हैं? जाहिर है कि पुलिस के कहने के अनुसार वहां पकड़े गए हवाला कारोबारियों की निशानदेही पर यहां छापा मारा गया। अब सवाल ये कि पुलिस को मिली सूचना सही थी। फादर ऐथोंनी ने चाहे पौने दस करोड़ की बरामदी को सोलह करोड़ बता कर सनसनी फैलाने की कोशिश की हो पर पुलिस की सच्चाई की तो वे पुष्टि करते हैं कि पुलिस ने छापा सही स्थान पर मारा था। इसमें से एक और सवाल उठता है कि यदि वो पकड़ा गया पैसा सचमुच किताबों को बेच कर ही इक्ट्ठा किया गया तो फिर हवाला कारोबारियों को कैसे पता चला कि इस भवन में बड़ी मात्रा में पैसा मौजूद है? क्या हवाला कारोबारियों का इस भवन से और भी कोई संपर्क या नाता है?

4. किसी भी प्रकार के कारोबार या कोई भी सामान बेचने खरीदने के नियमों में बीस हजार से ज्यादा का भुगतान चैक के माध्यम से होता है फिर सोलह करोड़ की राशि कैश कैसे एकत्रित हुई?

5. जिन दुकानदारों को किताबें बेच कर पैसे लिए गए उनके खातों की भी जांच होनी चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर चैक से पेमेंट करने के स्थान पर बड़ी मात्रा में फादर की कंपनी को कैश दिया?

6. अभी तो एडमिशन शुरु ही हुए हैं। किताबों वाले धंधे में कमसे कम तीन महीने की उधारी चला करती है। फिर फादर की कंपनी की किताबों में ऐसा क्या है कि सेल शुरु होने से पहले ही करोड़ों रुपओं की बरसात हो गई?

7. साउथ इंडियन बैंक के उस खाते की जांच होनी चाहिए कि इस प्रकार के लेनदेन की प्रक्रिया कब से चल रही है?

8. देश में सक्रिय इसाई मिशनरियों से ये हलफनामा लिया जाना चाहिए कि वे लोग इस प्रकार की कितनी कंपनियां चला रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि विदेशों से फंड के नाम पर हवाला से आए पैसों (जैसा कि खन्ना के एस.एस.पी श्री दहिया का दावा है) को सफेद धन में परिवर्तित दिखा कर देश की शासन प्रणाली की आंखों में धूल झोंकने की कितनी फैक्ट्रियां चल रही हैं।

फादर ऐंथोंनी के इस इंकशाफ से एक और संदेह तो उत्पन हो ही गया है कि इस प्रकार की बहुत सारी संदिगध कंपनियों का अस्तित्व हो सकता है।