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जालन्धर नगर निगम के सारे अफसर नहीं है कामचोर, इस सुपरीडैंट ने तोड़ा पिछले 16 साल का रिकार्ड



जालन्धर अनिल वर्मा
जालन्धर नगर निगम के सारे अफसर भ्रष्टाचारी या फिर कामचोर नहीं है बल्कि कई ऐसे अफसर भी हैं जो अपनी ड्यूटी को ही अपना धर्म मानते हैं। ऐसे ही एक वाटर रेट (बिलिंग) विभाग के सुपरीडैंट है मनीष दुगल। जिन्होने पिछले साल जून में इस विभाग का कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह शिकायत सैल में सुपरडैंट थे। मनीष दुगल ने शिकायत सैल में रहते हुए कई ऐसे सुधार किए जिससे यह विभाग अपने असली आसतित्व में आना शुरु हो गया था।


मनीष दुगल की काबिलियत को देखते हुए उन्हे वाटर बिलिंग विभाग का कार्य सौंपा गया जहां आने के बाद उन्होने शहर के उन कारोबारी संस्थानों पर शिकंजा कसा जहां माननीय हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2003 में दिए गए आदेशों के बाद भी वाटर मीटर नहीं लगवाया था और न ही इस विभाग में तैनात रह चुके किसी सुपरीडैंट द्वारा इन संस्थानों की ओर कोई ध्यान दिया गया।

श्री दुगल द्वारा शहर के नामचीन प्राईवेट स्कूल, कालेज, अस्पताल, होटल, वाशिंग सैंटर, बर्फ के कारखाने आदि को नगर निगम एक्ट 1976 की धारा 189 तथा 223 के तहत नोटिस जारी किए जिसके बाद इन सभी संस्थानों द्वारा पानी का कनैक्शन कटने के डर से लाखों रुपये जुर्माने के तौर पर नगर निगम के खाते में जमा करवाए और सभी जगह वाटर मीटर लगवाए गए।

आज जालन्धर के ज्यादातर स्कूल, कालेज, वाशिंग सैंटर, अस्पताल, होटल आदि में पानी का मीटर लग चुका है इसका श्रेय इस विभाग के सुपरीडैंट मनीष दुगल को ही जाता है। हमारा मानना है कि अगर सभी अफसर श्री दुगल द्वारा किए गए इन कार्यों से प्रेरणा लें तो नगर निगम जालन्धर पूरे पंजाब में प्रेरणा स्तोत्र बन सकता है।

इन संस्थानों को लगाए गए जुर्माने
जालन्धर रेलवे स्टेशन- 70 लाख
एपीजे – 10 लाख
केएमवी-9 लाख
एमजीएन- 3 लाख
इन्नौसैंट हार्ट स्कूल- 2.5 लाख
सेठ हुकम चंद- 3.25 लाख
छाबड़ा स्वीट्स- 70 हजार

……..अगला नाम आपका भी हो सकता है।