मां-बाप की सेवा न करने वाले बच्चों का प्रॉपर्टी पर भी हक नहीं, SDM अमित सरीन ने 50 इंतकाल रद्द कर बुजुर्गों को लौटाई


प्रॉपर्टी अपने नाम कराने के बाद बुजुर्ग मां-बाप की सेवा संभाल नहीं करने वाले बेटों-बहुओं और पोते के खिलाफ एसडीएम मेजर अमित सरीन की कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। वारिसों को ट्रांसफर जमीन के इंतकाल रद्द कर वापस बुजुर्गों के नाम कर दी है। बुुजर्गों को हर महीना खर्च देने के भी आदेश दिए हैं। एसडीएम ने ऐसे 50 केसों में फैसला सुनाया है। सेना में भी बतौर मेजर सेवाएं दे चुके एसडीएम अमित सरीन का कहना है कि ऐसा कर उन्हें सुकून मिला है। 

ये 9 केस- जिनमें बुजुर्गों ने बेटों-बहुओं के खिलाफ याचिका दायर की 

  • 1.गांव दालमवाल के तिलक राज ने जायदाद बेटों सुरिंदरजीत और सतविंदर के नाम की थी। अब दोनों बेटे उनका ख्याल नहीं रख रहे थे।  
  • 2. गांव अखलासपुर की किशन कौर ने  जायदाद बेटों जितेंदर कुमार और दिलराज कमार के नाम पर कर दी थी। बेटों ने सेवा नहीं की । 
  • 3. जालंधर के संतोख पुरा की स्वर्णी देवी ने बेटे केवल के नाम पर गांव नलोइया की जायदाद की थी। उनका बेटा उनकी देखभाल नहीं कर रहा।
  • 4. बस्सी जाना कनाल कॉलोनी होशियारपुर के देव राज ने बेटों रविंदर और हकूमत समेत बहू सुखविंदर कौर सोनिया के खिलाफ केस दायर किया था। कोर्ट ने सुखविंदर कौर सोनिया को आदेश दिए कि वह 6 महीने में देव राज को 6 लाख रुपए दे और उसके बाद देव राज के हिस्से की जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम करवाए।
  • 5. गांव कालूवाहर के जोगिंदर सिंह  ने केस दायर किया था कि उसने अपने  भाई की बहू के नाम जायदाद कर दी है लेकिन अब वह उसे खर्च नहीं दे रही। इस पर कोर्ट ने पीड़ित को प्रति महीना 4 हजार देने के आदेश बहू को दिए हैं।
  • 6. धन्न कौर वासी गांव शेरगढ़ ने अपनी जायदाद पोतेे अमरजीतपाल के नाम कर दी थी। बाद में उसने दादी की सेवा संभाल नहीं की। कोर्ट ने तबदील  की मलकीयत को कैंसिल कर दिया।
  • 7. लछमण दास वासी अहिराणा कलां की तरफ से बेटे जगदीश लाल को दी गई जायदाद को भी कोर्ट ने वापस दिला दिया। 
  • 8. गांव सलेरन की जोगिंदर कौर ने जायदाद बेटे बलविंदर सिंह के नाम पर की थी लेकिन बेटा सेवा संभाल नहीं कर रहा है। कोर्ट ने बलविंदर सिंह को तलब किया और मां-बेटे में समझौता करवा दिया। 
  • 9. गांव काहलवां के निर्मल सिंह का बेटा सर्बजीत सिंह जायदाद लेने के बाद भी संभाल नहीं कर रहा था। कोर्ट ने सर्बजीत सिंह को तलब कर समझाया।  अब सर्बजीत प्रति महीना पिता को खर्च देगा व सेवा करेगा। 

मां-बाप की सेवा फर्ज : एसडीएम 

अमित सरीन ने एसडीएम का पद 18 फरवरी 2019 को संभाला था। उनका कहना है कि हर किसी को अपने मां-बाप की सेवा करनी चाहिए। जो मां-बाप को नहीं संभाल सकते उन्हें उनकी जायदाद पर हक जताने का भी कोई अधिकार नहीं है।